Kaushlendra Pandey, पटना।बिहार के स्वास्थ्य विज्ञान जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण—गवर्नमेंट तिब्बिया कॉलेज एंड हॉस्पिटल (GTCH), पटना के पारिवारिक चिकित्सा एवं जनस्वास्थ्य (PSM) विभाग से एम.डी. कर रहे शोधार्थियों ने अपनी रिसर्च थीसिस जमा कर दी है। ये सभी शोधार्थी गंभीर जनस्वास्थ्य संकट — आर्सेनिक युक्त जल से निपटने हेतु हर्बल समाधान की दिशा में काम कर रहे हैं।

इन सात शोधार्थियों में शामिल हैं:
- डॉ. एच.के.एम. मश्कूर अहमद
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डॉ. अब्दुल्ला
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डॉ. सुल्तान अतीक
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डॉ. अरशद रजा
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डॉ. सैयद अब्दुल्ला
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डॉ. अब्दुल्ला हसन
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डॉ. सैयद सुफियान
इन सभी ने “हर्बल फिल्टर फॉर आर्सेनिक कंटैमिनेटेड वॉटर” पर सामूहिक रूप से कार्य किया है। यह शोध महावीर कैंसर संस्थान और अनुसंधान केंद्र, पटना के सहयोग से संपन्न हुआ। सह-निर्देशन में प्रतिष्ठित चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है, जिनके मार्गदर्शन में यह शोध कार्य एक निर्णायक मुकाम तक पहुँचा।
बिहार के 22 जिलों और 87 प्रखंडों में भूजल में आर्सेनिक की मात्रा WHO मानक (10 μg/L) से कहीं अधिक पाई गई है, जिससे 1 करोड़ से अधिक लोग प्रभावित हैं। यह शोध पारंपरिक यूनानी चिकित्सा (Unani Medicine), आयुष (AYUSH), और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों का समन्वय प्रस्तुत करता है।
सभी सहयोगियों और मार्गदर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया — “यह सामूहिक प्रयास बिना टीमवर्क, मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग के संभव नहीं था।”
यह शोध कार्य न केवल बिहार के लिए बल्कि भारत के अन्य आर्सेनिक प्रभावित राज्यों के लिए भी एक संभावित मॉडल बन सकता है।
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