Kaushlendra Pandey /जद (यू) विधान पार्षद सह मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री नीरज कुमार एवं प्रदेश प्रवक्ता डा0 अनुप्रिया यादव ने संयुक्त रुप से प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के अपने कार्यकाल के दौरान पांच लाख सरकारी नौकरी देने वाले दावे पर तीखा हमला बोला और उसे झूठ और फरेब की राजनीति का नमूना बताया।
उन्होंने कहा कि सच्चाई ये है कि गठबंधन सरकार के अपने कार्यकाल के दौरान आरजेडी कोटे के शिक्षा मंत्री ने जानबूझकर शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया में रोड़े अटकाए, फाइलें दबाई और संचिका बार-बार लौटा दी। अगर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तत्कालीन अपर मुख्य सचिव की तत्परता न होती, तो शिक्षक बहाली महीनों पहले ही ठप हो चुकी होती। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की निर्णायक भूमिका के कारण ही शिक्षक बहाली प्रक्रिया में समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं एवं विशेषकर ओबीसी वर्ग को 52 प्रतिशत की सर्वाधिक हिस्सेदारी सुनिश्चित हुई।
तेजस्वी यादव से अहम सवाल –
1. क्या ये सही है कि टीआरई-2 की परीक्षा में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अपर मुख्य सचिव के अनुरोध पर सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिनांक 16 सितंबर 2023 को पदसृजन की प्रक्रिया को अनुमोदित किया था और महज 72 घंटों में कैबिनेट से स्वीकृति दिलाई थी?
2. अगर आरजेडी कोटे के शिक्षा मंत्री ने टीआरई-2 नियुक्ति की फाइल पर हस्ताक्षर किए थे – तो बताइए, कब किए? उसका माह, दिनांक और उसकी संचिका अथवा पत्रांक संख्या सार्वजनिक करें?
3. क्या यह सही नहीं है कि आपके कोटे के शिक्षा मंत्री ने नियुक्ति प्रक्रिया की संचिका बार-बार लौटाई जिससे नियुक्ति प्रक्रिया ठप रही?
4. क्या यह सच नहीं कि तत्कालीन अपर मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री से सीधे अनुमोदन लेना पड़ा, ताकि बहाली रुके नहीं?
5. क्या यह भी सच नहीं कि आपके कोटे के मंत्री महीनों तक कार्यालय नहीं गए, जब शिक्षक बहाली की फाइलें अटकी थी?
तेजस्वी यादव को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि पांच लाख नौकरी देने का फर्जी दावा करने वाले नेता प्रतिपक्ष को उपर्युक्त प्रश्नों का साक्ष्य के साथ जवाब देना चाहिए और झूठ और फरेब की राजनीति से बाज आना चाहिए।




























