पटना, १ मार्च। महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी दुनिया की रक्षा की शक्ति कविता में ही है। कला, संगीत और साहित्य जैसी सारस्वत विधाएँ अल्प संख्यक संस्कृति की देन हैं। यही अल्प-संख्यक संस्कृति समाज को बहुत कुछ देती है। समाज को संस्कारित और समृद्ध करती है। क्योंकि इन्हीं से समाज बनता है। कलम और कविता की शक्ति बहुत बड़ी होती है।
यह बातें रविवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में राष्ट्रीय बज्जिका भाषा परिषद के तत्त्वावधान में आयोजित पुस्तक-लोकार्पण समारोह में, दिवंगत साहित्यकार प्रो सियाराम तिवारी द्वारा संकलित और कवयित्री डा विद्या चौधरी द्वारा संपादित बज्जिका काव्य-संग्रह ‘बज्जिका के लोढ़ल फूल’ का लोकार्पण करते हुए, बिहार विधान परिषद के उप सभापति प्रो राम वचन राय ने कही। उन्होंने कहा कि जनपदीय भाषाओं का बहुत पुराना इतिहास है। इसके साहित्य के इतिहास पर गहन शोध होना चाहिए।

सभा की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कहा कि ‘बज्जिका’ बिहार की एक अत्यंत समृद्ध लोक-भाषा है और विगत कुछ दशकों में इस भाषा में अनेक मूल्यवान साहित्य का सृजन हुआ है। लोक-जीवन के संस्कार गीतों के सृजन लोक-भाषाओं में ही होते रहे हैं। ‘बज्जिका के लोढ़ल फूल’ एक ऐसा ही संग्रह है, जिसमें लोक-जीवन ही नहीं, लोक-संस्कृति और मिट्टी की मोहक सुगंध भी प्राप्त होती है।
डा सुलभ ने कहा कि भारत की समस्त लोक-भाषाएँ उन पुण्य-सलीला सरिताएँ हैं, जिनके संगम से ‘हिन्दी’ रूपी गंगा समृद्ध और विशाल होती है। हिन्दी की समृद्धि में भारत की समस्त मातृ-भाषाओं का महत्तम योगदान है।
राष्ट्रीय बज्जिका भाषा परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष ईं० राम नरेश शर्मा, बज्जिका के सुविख्यात विद्वान देवेन्द्र राकेश, सम्मेलन की उपाध्यक्ष डा मधु वर्मा, डा सुशांत कुमार, डा ध्रुव कुमार , डा पुष्पा गुप्ता, मणि भूषण प्रसाद सिंह अकेला, शशि भूषण कुमार तथा कुमार अनुपम ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर, बज्जिका की मूल्यवान सेवा करने वाले पाँच वरिष्ठ साहित्यकारों साकेत बिहारी शर्मा ‘शितिकण्ठ’, अवधेश तृषित, अखौरी चन्द्रशेखर, उदय नारायण सिंह तथा शम्भु शरण मिश्र को सम्मानित किया गया। अतिथियों का स्वागत बज्जिका परिषद की उपाध्यक्ष डा विद्या चौधरी ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन रमेंद्र कुमार चौधरी ने किया।
वरिष्ठ कवयित्री आराधना प्रसाद, प्रो पुष्पा गुप्ता, डा पुष्पा जमुआर, सागरिका राय, डा मनोज गोवर्द्धन पुरी, डा उपेंद्र प्रसाद, प्रेम कुमार वर्मा, विभारानी श्रीवास्तव, डा अर्चना त्रिपाठी, सुजाता मिश्र, चंदा मिश्र, सिद्धेश्वर, शमा कौसर ‘शमा’, डा शालिनी पाण्डेय, डा विनोद कुमार सिन्हा, बाँके बिहारी साव, डा अरविंद कुमार, प्रतिभा कुमारी, डा आर प्रवेश, सरस्वती मिश्रा, प्रो दिनेश कुमार सिंह, जय प्रकाश पुजारी, ई० अशोक कुमार, किरण कुमारी, सुरेंद्र कुमार चौधरी, राज प्रिया रानी, ज्योति मिश्रा, आचार्य आनन्द किशोर शास्त्री, प्रवीर कुमार पंकज, इन्दु भूषण सहाय आदि बड़ी संख्या में साहित्य-सेवी उपस्थित थे।


























