Kaushlendra Pandey | कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी/ भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने 9वें अंतर्राष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में सहभागिता करते हुए संथाल समुदाय के ऐतिहासिक संघर्ष, संस्कृति और गौरवशाली परंपरा को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संथाल समाज के लिए यह गर्व का विषय है कि उनके पूर्वज Tilka Majhi ने लगभग 240 वर्ष पहले शोषण और अन्याय के विरुद्ध विद्रोह का ध्वज उठाया था।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि तिलका माझी के विद्रोह के लगभग 60 वर्ष बाद वीर भाइयों Sidhu Murmu और Kanhu Murmu ने Chand Murmu और Bhairav Murmu के साथ मिलकर तथा वीर बहनों Phulo Murmu और Jhano Murmu के सहयोग से वर्ष 1855 में ऐतिहासिक Santhal Hul का नेतृत्व किया। यह आंदोलन अंग्रेजी शासन और शोषण के खिलाफ आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक बन गया।
उन्होंने कहा कि संथाल समाज ने सदियों से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को सहेज कर रखा है। राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि संथाली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना इस समुदाय की पहचान और सम्मान के लिए एक महत्वपूर्ण कदम रहा है।
राष्ट्रपति ने संथाली भाषा और साहित्य के विकास में Raghunath Murmu के योगदान को भी याद किया, जिन्होंने ओल चिकी लिपि का आविष्कार कर संथाली भाषा को नई पहचान दी।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदायों की संस्कृति, प्रकृति के साथ उनका संबंध और उनकी पारंपरिक ज्ञान प्रणाली देश की अमूल्य धरोहर है। साथ ही उन्होंने युवाओं से शिक्षा और आधुनिक अवसरों को अपनाते हुए अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
— कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी





























