दिल्ली(जितेन्द्र कुमार सिन्हा)। बीते 22 फरवरी, 2026 को थावे विद्यापीठ के तत्वावधान में आयोजित विशेष अधिवेशन(एक दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन) के मुक्त सत्र में डॉ. मधुलिका कुमारी (बिहार की बेटी) को विद्यासागर (D.Litt)की मानद उपाधि से अलंकृत हुईं हैं। श्री दावड़ा विश्वविद्यालय(रायपुर)के इतिहास विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत डॉ. कुमारी विगत 15 वर्षों से योग प्रशिक्षक हैं। पर्यावरण जागरूकता अभियान में भी सराहनीय योगदान दे रही हैं।इसके साथ – साथ UPSC की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी पुस्तकों को सरल भाषा में लिखने का काम भी करती रही हैं। इनकी पुस्तकों में निम्न प्रमुख हैं – प्राचीन भारत का इतिहास,मध्यकालीन भारत का इतिहास, आधुनिक भारत का इतिहास,उत्तरी भारत में व्यापार और वाणिज्य वृद्धि …एक विश्लेषण,भारत का भूगोल,भारतीय राज व्यवस्था,सामान्य ज्ञान,योग और निरोगी जीवन। छात्रोपयोगी और जीवनोपयोगी पुस्तकों की रचयिता डॉ. कुमारी की नई पुस्तक – ” छत्तीसगढ़ की जनजातियाँ अतीत से आज तक ” का लोकार्पण भी उक्त मौके पर विद्यापीठ के कुलाधिपति श्री श्री 108 स्वामी(डॉ.) हरिहरानंद सरस्वती,कुलपति डॉ.विनय कुमार पाठक, प्रतिकुलपति डॉ. जंग बहादुर पांडेय, कुलसचिव डॉ.पी. एस. दयाल यति,उपकुलसचिव डॉ.गिरधारी लाल अग्रवाल के हाथों हुआ।यह पुस्तक विद्यासागर के लिए प्रस्तुत शोधग्रंथ – ” छत्तीसगढ पुस्तक फी जनजातिताँ अतीत से आज तक ” पर आधारित है।
डॉ. मधुलिका लगभग 10वर्षों से पत्रकारिता करती रही हैं। वर्तमान में मासिक पत्रिका ” जिज्ञासा संसार” के सहायक संपादक के पद पर रहते हुए पत्रकारिता धर्म का निर्वहन कर रही हैं। अभी दो विशेषांकों के लिए अतिथि संपादन कर रही हैं जो जल्द ही पाठकों के बीच होगा।
ज्ञात हो कि डॉ. मधुलिका कुमारी का जन्म बिहार के सिवान जिला के रानीवारी गाँव निवासी नवल किशोर भारती एवं माता श्रीमती फुलझड़ी देवी की सबसे छोटी संतान के रूप में हुआ। सामान्य परिवार में जन्मी डॉ. कुमारी के जीवन पर शिक्षक पिता के शैक्षणिक अनुभव का प्रभाव पड़ा,वहीं गृहणी मां से ईमानदारी,त्याग,समर्पण और सेवा संस्कार विरासत में मिले।माता पिता की देखरेख में प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही प्राप्त की,उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली चली गईं।अपने शैक्षणिक,सामाजिक,योग और पत्रकारिता के लिए इन्हें अब तक 4 अंतरराष्ट्रीय,25 राष्ट्रीय एवं दर्जनों अन्य सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।




























