जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता श्री हिमराज राम एवं मीडिया पैनलिस्ट डॉ मधुरेंदु पांडेय ने जारी बयान में कहा कि बिहार आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सतत विकास, हरित ऊर्जा और समावेशी प्रगति के एक नए युग में प्रवेश कर चुका है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार की बढ़ती उपलब्धियां न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं, बल्कि यह कृषि, सिंचाई और जल संकट जैसे गंभीर मुद्दों के स्थायी समाधान का आधार भी बन रही हैं। आज सोलर पावर बिहार के विकास का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रयासों ने ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं। जहां पहले किसानों को बिजली की अनिश्चित आपूर्ति और डीजल आधारित सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई व्यवस्था उन्हें सस्ती, सुगम और भरोसेमंद सुविधा प्रदान कर रही है। इससे किसानों की लागत में कमी आई है, उत्पादन क्षमता बढ़ी है और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस प्रगति हुई है। बिहार में सोलर पावर का विस्तार केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल संकट के समाधान में भी अहम भूमिका निभा रहा है। सौर ऊर्जा आधारित पंप, जल आपूर्ति तंत्र और ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा-सक्षम संसाधनों के माध्यम से सरकार ने यह सिद्ध किया है कि आधुनिक तकनीक और संवेदनशील शासन मिलकर स्थायी विकास का मजबूत मॉडल प्रस्तुत कर सकते हैं। जल संरक्षण, सिंचाई सुविधा और ऊर्जा उपलब्धता—इन तीनों क्षेत्रों में सौर ऊर्जा एक साथ परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में “आशा मॉडल” नए बिहार की मजबूत नींव रख रहा है। यह मॉडल केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि गांव, किसान, महिला, युवा और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आशा मॉडल उस सोच का प्रतिनिधित्व करता है जिसमें आत्मनिर्भरता, सतत संसाधन प्रबंधन, सामाजिक भागीदारी और तकनीकी नवाचार को एक साथ जोड़ा गया है। यह मॉडल बिहार को केवल आज के लिए नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित, सक्षम और समृद्ध बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।






















