पटना:उर्दू और हिन्दी शायरी के रौनक रहे, मशहूर शायर डॉ. क़ासिम ख़ुरशीद अब हमारे बीच नहीं रहे। इस दुखद समाचार से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
शहर का यह ज़िंदा शायर, जिसकी शायरी में भावनाओं की गहराई और शब्दों की मिठास बसी थी, अचानक हमसे जुदा हो गए। उनके जाने का गहरा नुकसान है, और इसे भरना बेहद मुश्किल होगा।
बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ अनिल सुलभ ने कहा कि डॉ. क़ासिम ख़ुरशीद की कमी साहित्य और शायरी की महफ़िलों में हमेशा खलेगी। वे सिर्फ़ एक बड़े शायर ही नहीं, बल्कि अच्छे मित्र और सम्मानपूर्वक मिलने वाले इंसान थे। उनकी यादें और रचनाएँ हमेशा जीवित रहेंगी।
साहित्य प्रेमियों ने उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ की और उनके परिवार को यह दुःख सहने की ताक़त देने की प्रार्थना की। शायरी की महफ़िलों में अब उनके बिना एक खालीपन महसूस होगा।
कंट्री इनसाइड न्यूज एजेंसी के माध्यम से शायर के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
























