जद (यू) प्रदेश प्रवक्ता श्री हिमराज राम ने सोशल संवाद करते हुए कहा कि बिहार ने पिछले दो दशकों में वह अद्भुत यात्रा तय की है, जिसे कभी असंभव माना जाता था। एक समय था जब बिहार अराजकता, भय, अपराध और भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुका था। 1990 से 2005 के बीच का वह दौर जब लोग कहते थे कि बिहार जाना खतरे से खाली नहीं, जब शाम के बाद लोग घर से निकलने से डरते थे, जब सड़कें गड्ढों में खो गई थीं और जब अपहरण उद्योग का रूप ले चुका था वही बिहार आज सुशासन, विकास और सामाजिक न्याय का प्रतीक बन चुका है।
यह बदलाव किसी नारे का परिणाम नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी नेतृत्व, प्रशासनिक क्षमता और “न्याय के साथ विकास” की नीति की देन है। जब 2005 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब बिहार की जनता ने उम्मीद की लौ जलायी थी, और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उस उम्मीद को विश्वास में बदल दिया।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफ कहा था बिहार अब अपराधियों के नहीं, कानून के राज से चलेगा। इसी भावना के साथ उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था को नई दिशा दी। फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था शुरू की, अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई हुई, हजारों को जेल भेजा गया और पुलिस प्रशासन को जवाबदेह एवं आधुनिक बनाया गया। नतीजा यह हुआ कि अपराध दर में उल्लेखनीय कमी आई और लोग अब बिना डर के रात में भी सड़कों पर निकलते हैं।
विकास की बात करें तो सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य को सरकार ने अपनी प्राथमिकता बनाई। 2005 में जहां गांवों में सड़क और बिजली का नाम तक नहीं था, आज लगभग हर गांव तक पक्की सड़कें और 24 घंटे बिजली की रोशनी पहुंच चुकी है। पहले जहां घंटे भर का सफर आधे दिन में तय होता था, वहीं आज मिनटों में पूरा होता है। शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की साइकिल योजना, पोशाक योजना और छात्रवृत्ति योजनाओं ने लाखों बेटियों को स्कूल तक पहुंचाया। ड्राॅपआउट दर में भारी कमी आई और शिक्षा में बेटियों की भागीदारी बढ़ी। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सशक्त बनाया गया, मुफ्त दवा और इलाज की व्यवस्था ने ग्रामीण इलाकों तक राहत पहुंचाई। कृषि और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव हुए। कृषि रोडमैप के माध्यम से किसानों को बीज, खाद, सिंचाई और बाजार की सुविधा दी गई। किसानों की आय बढ़ी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई।
सामाजिक न्याय और समावेशिता की बात करें तो नीतीश कुमार जी ने समाज के हर वर्ग को समान सम्मान और अवसर देने का कार्य किया। उन्होंने पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं को शासन और प्रशासन में भागीदारी दी। पंचायतों में महिलाओं को 50ः आरक्षण देकर स्थानीय नेतृत्व को नया स्वरूप दिया। अनुसूचित जाति-जनजाति उद्यमिता योजना के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार का अवसर मिला और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़े। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों ने समाज की तस्वीर बदल दी। आज बिहार की महिलाएं मुखिया, पुलिस अधिकारी, अधिकारी और उद्यमी बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि राज्य का गौरव बढ़ा रही हैं। मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना, पोशाक योजना और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं ने युवाओं को आत्मविश्वास और अवसर दोनों दिए हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार के हर वर्ग, हर समुदाय और हर नागरिक के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आवश्यक हैं क्योंकि उन्होंने यह सिद्ध किया है कि जहां कानून मजबूत होता है, वहीं समाज सुरक्षित और राज्य समृद्ध होता है। दलितों से लेकर पिछड़ों तक, महिलाओं से लेकर युवाओं तक, किसानों से लेकर व्यापारियों तक हर वर्ग के दिल में आज यही भावना है कि बिहार के लिए नीतीश जरूरी हैं, विकास के लिए नीतीश जरूरी हैं, सुशासन के लिए नीतीश जरूरी हैं।

























