पटना, १५ फरवरी। अहंकार साधना के मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। थोड़ी सी भी उपलब्धि प्राप्त होते ही बड़े-बड़े भक्त और साधकों को भी अहंकार हो जाता है। अहंकार एक बड़े शत्रु की भांति साधकों को साधना के मार्ग से डिगा देता है। इसलिए प्रत्येक साधक को सद्गुरु में प्रीति रखते हुए, निरन्तर यह प्राथना करनी चाहिए कि बड़ी से बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धि के बाद भी अहंकार न आए !

यह बातें रविवार को १ माल रोड के प्रांगण में निर्मित विशाल पण्डाल में, आध्यात्मिक संस्था ‘अंतर्राष्ट्रीय इस्सयोग समाज’ द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि- महोत्सव में अपना आशीर्वचन देती हुईं संस्था की अध्यक्ष और ब्रह्मनिष्ठ सद्गुरुमाता माँ विजया जी ने कही । उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य में परमात्मा स्वयं विराजते होते हैं। प्रत्येक मनुष्य में शिव और शक्ति का वास है। इस्सयोग की साधना से शिव और शक्ति एकत्व को प्राप्त करते हैं। साधना से शक्ति आती ही है। किंतु अर्जित शक्तियां निरंतर इंद्रियों के माध्यम से निकलती भी रहती है। जिस प्रकार सूर्य की किरणों को मैग्निफ़ाइंग ग्लास के माध्यम से एक स्थान पर केंद्रित कर वस्तु में आग लगायी जा सकती है, उसी प्रकार आंतरिक-साधना से मन की शक्तियों को संचित और केंद्रित कर अद्भुत लगने वाली उपलब्धियाँ प्राप्त की जा सकती है।
माताजी ने कहा कि मन बहुत शक्तिशाली किंतु चंचल है। यही सभी समस्याओं का कारण भी है, और इसी में निदान भी है। मन को साधने से शक्ति आती है। जैसे-जैसे विश्वास दृढ़ होता है, वैसे-वैसे मन भी सधने लगता है। जो साधक मन को साध लेता है। उसमें अपार शक्तियां आ जाती हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ साधना के नियमित अभ्यास से मन के समस्त मल दूर होते जाते हैं और आत्मा प्रकाशित होने लगती है।
इसके पूर्व संस्था के संयुक्त सचिव छोटे भैया श्री श्री संदीप गुप्ता ने अपने उद्गार में शिव-विवाह के रोचक प्रसंगों की चर्चा करते हुए कथात्मक व्याख्यान दिया और इस्सयोग की महिमा बतायी।
कार्यक्रम का आरंभ पूर्वाहन दस बजे ११ बार ‘ओमकारम’ के सामूहिक उद्घोष के साथ हुआ। संस्था के संयुक्त सचिव और वरिष्ठ इस्सयोगी सरोज गुटगुटिया ने महोत्सव में माताजी सहित देश-विदेश से आए हज़ारों इस्सयोगियों और अतिथियों का अभिनन्दन किया। अपने संबोधन में उन्होंने’इस्सयोग’ की सूक्ष्म साधना-पद्धति की दिव्यता से अतिथियों का परिचय कराया। इसके पश्चात एक घंटे का अखंडित भजन-संकीर्तन का कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसके उपरांत सदगुरुदेव के आह्वान की साधना की गयी। शिव-स्तुति और रुद्राष्टकम के पश्चात प्रभात झा एवं गोल्डी ने ‘शिव ताण्डव स्त्रोत्र” का गायन किया।
यह जानकारी देते हुए संस्था के संयुक्त सचिव डा अनिल सुलभ ने बताया कि इस अवसर पर विश्व के विभिन्न स्थानों से आए दो दर्जन इस्सयोगियों ने अपने उद्गार भी व्यक्त किए, जिनमे संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा, दीनानाथ शास्त्री, इशा कुमारी, सीमा बाबेजा, सुनील कुमार, संगीता ठाकुर, संतोष कुमार, निहारिका, सुमन सुहसरिया, गिरिजा शंकर, डा धीरेन्द्र कुमार, पूनम गुलाटी, अमीना राज, हरिवंश मोहाली, उदित गुटगुटिया, नंदिनी कुमारी, प्रो प्रशान्त, दीपक गुलाटी, बबीता हरिनगर तथा सुनीता गामी के नाम सम्मिल्लित हैं। ११ बाल-इस्सयोगियों शानवी सिंह, प्रसून झा, आफ़रीन शैन, वेद तोतानानावर, लावण्या, हृदेश, श्रेयांश, शिवानी कुमारी, अमित और लंदन के बाल इस्सयोगी दैविक ने भी अपनी अनुभूतियाँ सुनायीं । कार्यक्रम का संचालन संस्था के सचिव कुमार सहाय वर्मा और संयुक्त सचिव (मुख्यालय) ईं उमेश कुमार ने किया।
इस अवसर पर ‘शक्तिपात-दीक्षा का कार्यक्रम गोला रोड स्थित संस्था के उत्सव-भवन ‘एम एस एम बी भवन’ में आयोजित किया गया, जिसमें माताजी ने तीन सौ से अधिक नव-जिज्ञासु स्त्री-पुरुषों को इस्सयोग की साधना आरंभ करने के लिए आवश्यक शक्ति-पात दीक्षा प्रदान की। संस्था की कार्य समिति की बैठक, सांस्कृतिक-कार्यक्रम, जगत-कल्याण के लिए सामूहिक ‘ब्रह्मांड-साधना’ और महाप्रसाद के साथ महोत्सव का समापन हुआ।
इस अवसर पर, संस्था की संयुक्त सचिव नैना दुबे गुप्ता, मोकामा की पूर्व विधायक नीलम सिंह, लक्ष्मी प्रसाद साहू, शिवम् झा, वंदना वर्मा, अनंत कुमार साहू, अजीत पटनायक, डा द्राशनिका सोलंकी, कपिलेश्वर मण्डल, जोगेन्द्र प्रसाद, संजय कुमार, राजेश वर्णवाल, नितिन साहू, अरविन्द कुमार, सतीश प्रसाद, किरण प्रसाद, मंजू देवी, अंजलि मंजीता, डा गिरिजा शंकर, माया साहू, अजय कुमार पांडेय, रवि कुमार, प्रभात झा, अमित लालू आदि बड़ी संख्या में संस्था के अधिकारी, कार्यसमिति के सदस्य और स्वयंसेवक निरंतर सक्रिय रहे। समारोह में देश विदेश के पाँच हज़ार से अधिक इस्सयोगियों ने भाग लिया।


























