रामेश्वर महाविद्यालय एवं मुजफ्फरपुर जनहित प्रतिष्ठान के संयुक्त तत्वावधान में महाविद्यालय के किशोरी सिन्हा सभागार में भारत रत्न सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जन्मशती को प्राचार्य प्रो.(डॉ.) श्यामल किशोर की अध्यक्षता में समारोहपूर्वक मनाया गया ।
जयंती समारोह में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, भारत सरकार के पूर्व अध्यक्ष डॉ.भगवान लाल सहनी तथा विशिष्ट अतिथि राजकीय डिग्री कॉलेज मधुबन के प्राचार्य प्रो.(डॉ.) ब्रह्मचारी व्यास नंदन, समाजसेवी राजेंद्र पटेल एवं डॉ. ललन तिवारी रहे ।
जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. भगवान लाल सहनी ने कहा कि भारतीय राजनीति के इतिहास में सरदार वल्लभभाई पटेल के अवदान को स्मरण करते हुए हम सब रोमांचित हो उठते हैं
गृह मंत्री के रूप में, उन्होंने सांप्रदायिक संघर्ष से जूझते हुए देश में व्यवस्था और शांति कायम करने के प्रयासों का नेतृत्व किया । उन्होंने एक कुशल प्रशासक की तरह इस कार्य को कुशलतापूर्वक पूर्ण किया ।
वल्लभभाई ने विभाजन की समस्याओं का समाधान किया, कानून व्यवस्था बहाल की और हजारों – हजार शरणार्थियों के पुनर्वास का काम बड़े साहस और दूरदर्शिता के साथ किया । उन्होंने ब्रिटिश शासन के जाने के बाद क्षीण हो चुकी हमारी सेवाओं का पुनर्गठन किया और एक नई भारतीय प्रशासनिक सेवाओं का गठन किया, जिससे हमारे नए लोकतंत्र को एक स्थिर और सुदृढ़ प्रशासनिक आधार प्रदान किया जा सके । उनका यह प्रयास स्वतंत्र भारत के नव उत्थान का प्रमुख हेतु बना ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रो.(डॉ.) श्यामल किशोर ने बताया कि भारत के संविधान निर्माण के दौरान, वल्लभ भाई पटेल अंतरिम सरकार में गृह और सूचना प्रसारण मंत्री थे । उन्होंने 565 रियासतों के साथ बातचीत करने और उन्हें भारत संघ में एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । उनके कार्यों और योगदान को देखते हुए उन्हें ‘भारत का लौह पुरुष’ कहा जाता है । स्वतंत्र भारत के पहले गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने कई अविस्मरणीय कार्य किए । जब गांधीजी को 1923 में जेल जाना पड़ा गया, तो पटेल जी ने नागपुर में सत्याग्रह आंदोलन का नेतृत्व किया और अपने कौशल से अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजा दी । सरदार पटेल के अनगिनत कार्यों को पटल पर रखते प्रो. श्यामल ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में सरदार का पटेल बड़ा अवदान है। असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से वे शामिल रहे जिसके चलते उन्हें अंग्रेजों द्वारा कई बार गिरफ्तार किया गया था। आज पटेल जी को याद करके हम सब स्वयं गौरवांवित हो रहे हैं ।
राजकीय डिग्री कॉलेज मधुबन, पकड़ी दयाल के प्राचार्य प्रो .(डॉ.) ब्रह्मचारी व्यास नंदन ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक भारत के इतिहास में सरदार पटेल का कोई सानी नहीं है । उनके कार्य, उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति उनके निर्णयों में समाहित दिखाई देता है । खिलाफत आंदोलन हो या खेड़ा आंदोलन पटेल जी ने आगे बढ़कर गाँधी जी का सहयोग किया । गांधी जी के असहयोग आंदोलन को समर्थन देने के लिए पटेल जी ने अपनी वकालत भी छोड़ दी । उनका यह त्याग भारतीय राजनीतिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखे जाने योग्य है । प्रो. व्यासनंदन ने सरदार वल्लभभाई पटेल के केवल राजनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया ।
समाजसेवी राजेंद्र पटेल ने बताया कि बचपन से से ही वल्लभभाई पटेल में नेतृत्व की अभूतपूर्व क्षमता थी ।संगठन और नेतृत्व के विलक्षण गुण ने ही उनके भविष्य के मार्ग को प्रशस्त किया ।
प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. ललन तिवारी ने वर्तमान राजनीति और पटेल जी के कार्यों की तुलनात्मक समीक्षा की ।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ.शारदा नंद सहनी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन मुजफ्फरपुर जनहित प्रतिष्ठान के सचिव एवं कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अरुण कुमार सिंह ने किया ।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. शारदानंद सहनी, डॉ.धीरज कुमार सिंह, डॉ. उपेंद्र गामी, डॉ. संदीप कुमार सिंह, डॉ. गोवर्धन,डॉ. उपेंद्र प्रसाद, डॉ.अभिनय कुमार, डॉ. वसीम रजा, डॉ. माहेश्वर प्रसाद सिंह, डॉ.सर्वेश्वर, डॉ. बादल कुमार, डॉ. सज्जाद, डॉ. मीरा कुमारी, डॉ. अंबुजेश कुमार मिश्र, डॉ. अखिलेंद्र कुमार सिंह, डॉ. रणवीर सिंह,डॉ. स्मृति चौधरी, डॉ. अनीता कुमारी, मुजफ्फरपुर जनहित प्रतिष्ठान के सचिव डॉ. अरुण कुमार सिंह तथा डॉ. कामिनी कुमारी सहित
कर्मचारियों में सीतेश कुमार, रीतेश रंजन, रजनीश कुमार,किशन,प्रशांत, अभिषेक कुमार सहित बड़ी संख्या में
छात्र – छात्राओं की उपस्थिति रही ।

























